डिजिटल मेंटल हेल्थ सेंटर से भारत के गांव-गांव के लोगों को मिलेगा बेहतर इलाज



डिजिटल मेंटल हेल्थ सेंटर से भारत के गांव-गांव के लोगों को मिलेगा बेहतर इलाज







मानसिक बीमारी से पीड़ित ज्यादातर मरीज अभी इलाज नहीं करा पाते हैं। इसका बड़ा कारण मनोचिकित्सकों व चिकित्सा सुविधाओं की कमी है। कोरोना ने डिजिटल मेंटल हेल्थ केयर के जरिये मानसिक बीमारियों के इलाज के लिए एक नई राह दिखाई है। कोरोना के कारण बदले हुए परिवेश में मानसिक बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल हो रही नई तकनीकों को कम खर्च में डिजिटल मेंटल हेल्थ सेंटर विकसित कर गांवों व छोटे शहरों में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए इस बार स्‍वास्‍थ्‍य बजट में प्रौद्योगिकी को मुख्‍य स्‍थान दिया गया है।


यानि अब गांव में भी मानसिक बीमारियों का सस्ता और बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा। कल्पना कीजिए जब बड़े शहरों में बैठकर ही डॉक्टर ऑनलाइन मरीज का इलाज कर सकेंगे। कोरोना के कारण पिछले डेढ़ साल में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को काफी बढ़ावा मिला है। इससे अब इलाज के लिए भी ऑनलाइन दवाएं लिखी जाने लगीं।


गांव-गांव में इलाज के लिए मिली मोबाइल डिस्पेंसरी वैन


स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा कोरोना के समय में गांव-गांव में इलाज के लिए मोबाइल डिस्पेंसरी वैन उपलब्ध कराई गई। इससे भी देश के ग्रामीण इलाकों में काफी लाभ मिला। ये मोबाइल डिस्पेंसरी वैन गरीब समुदाय के लोगों के लिए मिल का पत्थर साबित हुई। इनके जरिए ग्रामीणों को मुफ्त इलाज मुहैया कराया गया।


आयुष्मान भारत ने गरीब के जीवन की चिंता की दूर


स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रयासों से ‘आयुष्मान भारत- PM JAY’ ने आज गरीब के जीवन की चिंता दूर कर दी है। अभी तक 3 करोड़ से अधिक देशवासियों ने इस योजना के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा का लाभ उठाया है और इसमें भी आधी लाभार्थी, हमारी माताएं हैं, हमारी बहन-बेटियां हैं। सभी जानते हैं कि सस्ते इलाज के अभाव में सबसे अधिक तकलीफ देश की माताएं-बहनें ही उठाती थीं। घर की चिंता, घर के खर्चों की चिंता, घर के दूसरे लोगों की चिंता में हमारी माताएं-बहनें अपने ऊपर होने वाले इलाज के खर्च को हमेशा टालती रहती हैं, पूछने पर वो ऐसे ही कहती हैं कि नहीं अभी ठीक हो जाएगा, नहीं ये तो एक दिन का मामला है, नहीं ऐसे ही एक पुड़िया ले लुंगी तो ठीक हो जाएगा क्योंकि मां का मन है, वो दुख झेल लेती हैं लेकिन परिवार पर कोई आर्थिक बोझ आने नहीं देती।


आयुष्मान भारत के तहत, जिन्होंने अभी तक इलाज का लाभ लिया है, या फिर जो उपचार करा रहे हैं, उनमें से लाखों ऐसे साथी हैं, जो इस योजना से पहले अस्पताल जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाते थे, टालते रहते थे लेकिन पैसे की कमी की वजह से अस्पताल नहीं जा पाते थे। इस तकलीफ का एहसास ही हमें भीतर तक झकझोर देता है। कोरोना काल में और उससे पहले स्वास्थ्य मंत्रालय की आयुष्मान भारत योजना ने इन सभी की मुश्किलें दूर की।


स्वास्थ्य मंत्रालय की योजनाएं बहुत बड़ा संबल 


स्वास्थ्य मंत्रालय की योजनाओं के बूते आज देश में उस बूढ़ी मां को इलाज मुहैया हुआ जो बरसों तक दर्द सहने के बाद पथरी का ऑपरेशन करा पाई, वो नौजवान जो किडनी की बीमारी से परेशान था, किसी को पैर में तकलीफ, किसी को रीढ़ की हड्डी में तकलीफ। आज आयुष्मान भारत, ऐसे सभी लोगों के लिए बहुत बड़ा संबल बनी है।


बीते 3-4 साल में जो हजारों करोड़ रुपए सरकार ने वहन किए हैं, उससे लाखों परिवार गरीबी के कुचक्र में फंसने से बचे हैं। कोई गरीब रहना नहीं चाहता है, कड़ी मेहनत करके गरीबी से बाहर निकलने के लिए हर कोई कोश‍िश करता है, अवसर तलाशता है। कभी तो लगता है कि हां बस अब कुछ ही समय में अब गरीबी से बाहर आ जाएगा और अचानक परिवार में एक बीमारी आ जाए तो सारी मेहनत मिट्टी में मिल जाती है। फिर वो पांच-दस साल पीछे उस गरीबी के चक्र में फंस जाता है। बीमारी पूरे परिवार को गरीबी के कुचक्र से बाहर नहीं आने देती है और इसलिए आयुष्मान भारत सहित, हेल्थकेयर से जुड़े जो भी समाधान सरकार सामने ला रही है, वो देश के वर्तमान और भविष्य में एक बहुत बड़ा निवेश है।


वर्तमान में अस्पतालों में टेक्नोलॉजी का जो इस्तेमाल होता है, वो फिलहाल सिर्फ एक ही अस्पताल तक या एक ही ग्रुप तक सीमित रहता है। नए अस्पताल या नए शहर में जब मरीज जाता है, तो उसको फिर से उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड्स के अभाव में उसको सालों-साल से चली आ रही फाइलें लेकर चलना पड़ता है। इमरजेंसी की स्थिति में तो ये भी संभव नहीं होता है। इससे मरीज और डॉक्टर, दोनों का बहुत सा समय भी बर्बाद होता है, परेशानी भी ज्यादा होती है और इलाज का खर्च भी बहुत अधिक बढ़ जाता है।


हम अक्सर देखते हैं कि बहुत से लोगों के पास अस्पताल जाते समय उनका मेडिकल रिकॉर्ड ही नहीं होता। ऐसे में जो डॉक्टरी परामर्श होता है, जांच होती है, वो उसको बिलकुल जीरो से शुरू करनी पड़ती है, नए सिरे से शुरू करना पड़ता है। मेडिकल हिस्ट्री का रिकॉर्ड न होने से समय भी ज्यादा लगता है और खर्च भी बढ़ता है और कभी-कभी तो उपचार कॉन्ट्राडिक्टरी भी हो जाता है और हमारे गांव-देहात में रहने वाले भाई-बहन तो इस वजह से बहुत परेशानी उठाते हैं। इन सभी नागरिकों को इस तरह की परेशानी से मुक्ति दिलाने में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन बड़ी भूमिका निभाएगा।


डिजिटल हेल्थ सॉल्यूशंस


आयुष्मान भारत- डिजिटल मिशन, अब पूरे देश के अस्पतालों के डिजिटल हेल्थ सॉल्यूशंस को एक दूसरे से कनेक्ट करने का काम कर रहा है। इसके तहत देशवासियों को अब एक डिजिटल हेल्थ आईडी दी जाएगी। हर नागरिक का हेल्थ रिकॉर्ड भी डिजिटली सुरक्षित रहेगा। डिजिटल हेल्थ आईडी के माध्यम से मरीज खुद भी और डॉक्टर भी पुराने रिकॉर्ड को जरूरत पड़ने पर चेक कर सकता है। यही नहीं, इसमें डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिक्स जैसे साथियों का भी रजिस्ट्रेशन होगा। देश के जो अस्पताल हैं, क्लीनिक हैं, लैब्स हैं, दवा की दुकानें हैं, ये सभी भी रजिस्टर होंगी। यानि ये डिजिटल मिशन, हेल्थ से जुड़े हर स्टेक-होल्डर को एक साथ, एक ही प्लेटफॉर्म पर ले आएगा। यानि इस मिशन का सबसे बड़ा लाभ देश के गरीबों और मध्यम वर्ग को होगा।


देश में एम्स का नेटवर्क हो रहा तैयार


देश में हेल्थ इंफ्रा के विकास और बेहतर इलाज की सुविधाएं, देश के कोने-कोने तक पहुंचाने के लिए, नई स्वास्थ्य नीति बनाई गई। आज देश में एम्स जैसे बहुत बड़े और आधुनिक स्वास्थ्य संस्थानों का नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है। हर 3 लोकसभा क्षेत्र के बीच एक मेडिकल कॉलेज का निर्माण भी प्रगति पर है।


मेडिकल एजुकेशन में भी अभूतपूर्व रिफॉर्म्स


स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रयासों से भारत के हेल्थ सेक्टर को ट्रांसफॉर्म करने के लिए मेडिकल एजुकेशन में भी अभूतपूर्व रिफॉर्म्स किए जा रहे हैं। 7-8 साल में पहले की तुलना में आज अधिक डॉक्टर्स और पैरामेडिकल मैनपावर देश में तैयार हो रही है। सिर्फ मैनपावर ही नहीं बल्कि हेल्थ से जुड़ी आधुनिक टेक्नॉलॉजी, बायोटेक्नॉलॉजी से जुड़ी रिसर्च, दवाओं और उपकरणों में आत्मनिर्भरता को लेकर भी देश में मिशन मोड पर काम चल रहा है। कोरोना की वैक्सीन के डवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग में भारत ने जिस तरह अपना सामर्थ्य दिखाया है, वो हमें गर्व से भर देता है। स्वास्थ्य उपकरणों और दवाओं के कच्चे माल के लिए देश ने सराहनीय कार्य किया है।


स्वास्थ्य सेवाओं और सामान को किया सस्ता


बेहतर मेडिकल सिस्टम के साथ ही, ये भी जरूरी है कि गरीब और मध्यम वर्ग का दवाओं पर कम से कम खर्च हो। इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने जरूरी दवाओं, सर्जरी के सामान, डायलिसिस, जैसी अनेक सेवाओं और सामान को सस्ता रखा है। भारत में ही बनने वाली दुनिया की श्रेष्ठ जेनरिक दवाओं को इलाज में ज्यादा से ज्यादा उपयोग में लाने के लिए प्रोत्साहन दिया गया है। जन औषधि केंद्र के कारण ऐसे मध्यमवर्गीय परिवार हजार, पंद्रह-सौ, दो-दो हजार रुपया हर महीना बचा रहा है।


आज दुनिया का भरोसा, भारत के डॉक्टर्स और हेल्थ सिस्टम पर


स्वास्थ्य मंत्रालय के विभिन्न प्रयासों से आज दुनिया का भरोसा, भारत के डॉक्टर्स और हेल्थ सिस्टम पर लगातार बढ़ रहा है। भारत को इंफ्रास्ट्रक्चर अगर मिल जाए तो दुनिया से हेल्थ के लिए भारत आने वालों की संख्या बढ़नी ही बढ़नी है। इसी दिशा में देश में तेजी से काम किया जा रहा है। केवल इतना ही नहीं हमारे वैक्सीनेशन प्रोग्राम, Co-Win टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और फार्मा सेक्टर ने हेल्थ सेक्टर में भारत की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया है। जब आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन द्वारा टेक्नोलॉजी की नई व्यवस्थाएं विकसित होंगी, तो दुनिया के किसी भी देश के मरीज को भारत के डॉक्टरों से कंसल्ट करने, इलाज कराने, अपनी रिपोर्ट उन्हें भेजकर परामर्श लेने में आसानी होगी। निश्चित तौर पर इसका प्रभाव हेल्थ टूरिज्म पर भी पड़ेगा।


मरीज को देश में कहीं भी डॉक्टर ढूंढने में होगी आसानी


मरीज को देश में कहीं पर भी ऐसा डॉक्टर ढूंढने में आसानी होगी, जो उसकी भाषा भी जानता और समझता है और उसकी बीमारी के उत्तम से उत्तम उपचार का वो अनुभवी है। इससे मरीजों को देश के किसी कोने में भी उपस्थित स्पेशलिस्ट डॉक्टर से संपर्क करने की सलूहियत बढ़ेगी। सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि बेहतर टेस्ट के लिए लैब्स और दवा दुकानों की भी पहचान आसानी से संभव हो पाएगी। इस आधुनिक प्लेटफॉर्म से इलाज और हेल्थ केयर पॉलिसी मेकिंग से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम और अधिक प्रभावी होने वाला है। डॉक्टर और अस्पताल इस प्लेटफॉर्म का उपयोग अपनी सर्विस को रिमोट हेल्थ सर्विस प्रोवाइड करने में कर पाएंगे। प्रभावी और विश्वस्त डेटा के साथ इससे इलाज भी बेहतर होगा और मरीजों को बचत भी होगी।


देश में स्वास्थ्य सेवाओं को सहज और सुलभ बनाने का जो अभियान आज पूरे देश में शुरू हुआ है, ये 6-7 साल से चल रही सतत प्रक्रिया का एक हिस्सा है। बीते वर्षों में भारत ने देश में आरोग्य से जुड़ी दशकों की सोच और अप्रोच में बदलाव किया है। अब भारत में एक ऐसे हेल्थ मॉडल पर काम जारी है, जो होलिस्टिक हो, समावेशी हो। एक ऐसा मॉडल, जिसमें बीमारियों से बचाव पर बल हो,- यानि प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, बीमारी की स्थिति में इलाज सुलभ हो, सस्ता हो और सबकी पहुंच में हो।

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