दुनिया के 40 से 50 प्रतिशत वैक्सीन लोगों तक वैक्सीन पहुंचाएगा भारत

 विशेषज्ञों को भरोसा दुनिया के 40 से 50 प्रतिशत वैक्सीन लोगों तक वैक्सीन पहुंचाएगा भारत  

विजयी भव: के संकल्प के साथ दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण की तैयारियां अंतिम चरण पर हैं और दुनिया के तमाम देशों की निगाहें भारत पर हैं। जिस तरह से भारत एक के बाद एक कदम बढ़ा रहा है, उसे देखते हुए आने वाले समय में भारत दुनिया के 40 से 50 प्रतिशत लोगों तक कोरोना वैक्सीन पहुंचा सकता है। यह विश्वास जताया है स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं आईएलबीएस के निदेशक डॉ. के सरीन ने। 

भारत में 16 जनवरी से कोरोना वायरस का टीकाकरण शुरू होने जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर पहले तीन करोड़ स्वास्थ्यकर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर को वैक्सीन लगाई जाएगी। इसके बाद 50 से ऊपर की उम्र वालों को और 50 से कम उम्र वाले उन लोगों को जो पहले से कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हैं, वैक्सीन लगाई जाएगी। भारत ने दो कोरोना वैक्सीन का उत्पादन किया है। आईएलबीएस के डायरेक्टर डॉ. एस. के. सरीन कहते हैं कि वैक्सीन को साधारणतः बनने में 5 साल या उससे अधिक का समय लगता है। लेकिन कोरोना वैक्सीन के मामले में काफी ज्यादा पैसा डालने और समानांतर में कई प्रक्रियाओं के चलने के बाद इसकी वैक्सीन हम सभी के सामने आई है। 

वह आगे कहते हैं, देश के सभी वैज्ञानिकों, मेडिकल इंडस्ट्रीज, डॉक्टर्स साथ आए हैं और तब जाकर हम वैक्सीन बनाने में सफल हुए हैं। एक से ज्यादा वैक्सीन बनाना एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाना चाहिए। इस वैक्सीनेशन ड्राइव में हम फ्रंट रनर के तौर पर हैं। शुरुआत में वैक्सीन बनानें वालों में केवल ऑक्सफोर्ड और विश्व के अलग-अलग 9 सेंटर को चिन्हित किया गया था। जिसमें से भारत और ब्रिटेन के अलावा इसका कहीं भी उत्पादन नहीं किया गया। डॉ. सरीन के अनुसार, आने वाले समय में ये वैक्सीन वैश्विक बाजार का 40 से 50 प्रतिशत तक कवर करने वाली हैं। 

7-8 महीनों में हो जाएगा 30 करोड़ लोगों का टीकाकरण 

कोरोना टीकाकरण के इस बड़े कैंपेन में सबसे बड़ी चुनौती सभी लोगों तक वैक्सीन का पहुंचना है। इसपर भारत सरकार के मुख्य सलाहकार प्रो. के. विजय. राघवन कहते हैं कि हम इसकी लिए पूरी तरह तैयार है। हमारे यहां फ्रंटलाइन वर्कर्स की आबादी ही कई देशों की पूरी आबादी से ज्यादा है। 50 वर्ष की उम्र बड़े लोगों की संख्या ही लगभग 30 करोड़ के करीब है। यह एक बहुत बड़ा कैंपेन होने वाला है। 7-8 महीनों में 30 करोड़ तक लोगों का टीकाकरण हो जाएगा। इस दौरान तब तक और अधिक वैक्सीन का उत्पादन किया जा सकेगा और सप्लाई भी काफी हद तक हो चुकी होगी। समानांतर में बाकी लोगों के लिए भी वैक्सीनेशन प्रोग्राम चलाया जाएगा।

वैक्सीन कितने समय के लिए होगी कारगर और कितनी सुरक्षित?

वैक्सीन कितने समय तक कारगर रहेगी इसपर प्रो. राघवन कहते है कि दवाई बीमारी में दी जाती है, वहीं वैक्सीन उस बीमारी से बचने के लिए दी जाती है। वैक्सीन को लेकर आए अभी तक के डेटा के अनुसार, 4 महीने तक एंटीबाडीज या प्रतिरक्षा क्षमता होती है। लेकिन अगर आपको वैक्सीन लगने में बहुत समय लग रहा है तो किसी भी तरह की लापरवाही ने बरतें और अपना बचाव करते रहें। वह आगे कहते हैं कि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है।

कैसे किया जाएगा लोगों को मॉनिटर?

बता दें, भारत सरकार द्वारा वैक्सीन रजिस्ट्रेशन के लिए कोविन नामक ऐप रिलीज किया गया है। इसके माध्यम से ही स्थान व सत्रों का निर्धारण किया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल उठता है कि आखिर वैक्सीनेशन ड्राइव की मॉनिटरिंग कैसे होगी? इसपर प्रो. राघवन बताते हैं  कि कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन के वक्त आइडेंटिटी या पहचान अपलोड होती है इसके साथ ही एक क्यूआर (QR) कोड मिलता है। इससे उनको उनकी वैक्सीनेशन की स्थिति पता चलती है। आईडी और क्यूआर कोड के साथ लोगों को भी फीडबैक देने की सुविधा दी गयी है। इसी ऐप के माध्यम से लोगों को मॉनिटर किया जाएगा। वैक्सीन लगने के कुछ दिनों तक, जबतक साइड इफेक्ट्स होने का खतरा रहता है, मॉनिटरिंग की जाएगी।

गर्भवती महिलाएं वैक्सीन लगवाने से बचें

दरअसल, वैक्सीन को लेकर कुछ ट्रायल्स करने अभी भी बाकि हैं। गर्भवती महिलाओं पर कोरोना वैक्सीन के प्रभावों को लेकर अभी तक भारत सरकार द्वारा कोई भी डेटा प्रकाशित नहीं किया गया है। इसपर डॉ. एस. के. सरीन कहते हैं कि किसी भी वैक्सीन से गर्भवती महिला को परेशानी नही है, लेकिन गर्भ में पल रहे बच्चे पर इसका क्या असर पड़ेगा यह कोई नहीं जानता। वह कहते हैं, “आमतौर पर किसी भी वैक्सीन को गर्भावस्था में नही लेना चाहिए। हां, कोरोना वैक्सीन का नवजात शिशुओं पर कहीं ट्रायल चल रहा है, और बच्चे पर कोई असर नहीं पड़ा है तो वह ली जा सकती है। लेकिन, मेरे हिसाब से कोरोना वैक्सीन को किसी भी गर्भवती को नहीं देना चहिए क्योंकि बच्चे पर असर पैदा होने के बाद 20 साल 25 साल तक कभी भी हो सकता है। जबतक सरकार द्वारा ट्रायल्स को लेकर कोई डेटा प्रकाशित नहीं किया जाये तबतक इससे बचना चाहिए। 

सभी के संकल्प और भागीदारी से होंगे विजयी

प्रो. राघवन बताते हैं, “ड्राई रन कुछ चंद जगहों में ही किया जाता है। ड्राई रन्स को कई बार री-रन किया गया है। हमें ये मानकर चलना चाहिए कि शुरुआती कुछ हफ्तों में परेशानी आ सकती है, लेकिन हम सभी को समझना होगा कि पहली बार में कुछ बेहतर नहीं हो सकता। इसमें समय लगेगा लेकिन सभी लोगों की सम्पूर्ण भागीदारी, प्रतिबद्धता और संकल्प के साथ हम इस महामारी पर विजय जरूर प्राप्त करेंगे।


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