संक्रमित लोग कब और कैसे लगवा सकते हैं वैक्सीन, बता रहे हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ
वैज्ञानिकों और भारत सरकार के अथक प्रयास के बाद आखिरकार वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ भारत ने वैक्सीन तैयार कर ली और वैक्सीनेशन के लिए दिन भी नियत कर दी है। 16 जनवरी से हमारे देश में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू होगा। लेकिन वैक्सीन वितरण के दौर में भी खुद का बचाव करना जरूरी है और कोविड-19 से बचने के लिए नियमों को अपनाना जारी रखें।
वैक्सीन से जुड़े सवाल और उससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं के जानने के लिए प्रसार भारती ने अपने विशेष कार्यक्रम कोरोना जागरूकता श्रृंखला में लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के डॉ. राजेंद्र के धमीजा से विशेष बातचीत की।
संक्रमित कब लगवा सकते हैं वैक्सीन
अगर कोई संक्रमित है, तो उसे वैक्सीन लगवानी चाहिए या नहीं इस बारे में डॉ धमीजा ने बताया कि अगर कोई संक्रमित है, तो सबसे पहले होम आइसोलेशन के नियमों का पालन करें। अगर अस्पताल में भर्ती हुए हैं, तो डॉक्टरों की निगरानी में रहें। जब तक संक्रमित हैं, तब तक बिलकुल बाहर नहीं जाना है, क्योंकि औरों के लिए भी रिस्क है। ऐसे में वैक्सीनेशन के लिए नहीं जाना है। जब संक्रमित के अंदर से वायरस खत्म हो जाए, तभी उसे वैक्सीनेशन के लिए जाना है। सबसे ध्यान देने वाली बात ये है कि वैक्सीन आने का ये अर्थ नहीं है कि बचाव के नियमों का पालन न करें। क्योंकि यह बहुत बड़ा अभियान है और इसमें समय भी लगेगा।
मॉडर्ना और फाइजर ने बनाई है पहली आरएनए वैक्सीन
वहीं वैक्सीन बनाने के लिए कई तरह के अलग-अलग टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया है। ऐसे में आरएनए वैक्सीन कैसे काम करती है, इस बारे में उन्होंने कहा कि मैसेंजर आरएनए टेक्नोलॉजी से अब तक कई वैक्सीन बनायी गईं, लेकिन एक भी अप्रूव नहीं हुईं। यह पहली आरएनए वैक्सीन है, जिसे अनुमति मिली है, जिसे मॉडर्ना और फाइजर ने बनायी है। इसमें वायरस के जीनोम से आरएनए को निकाल कर शरीर में इंजेक्ट करते हैं। यह मैसेंजर आरएनए कोड हमारी कोशिकाओं को निर्देश देता है कि आप स्पाइक प्रोटीन बनाइये। तब हमारा शरीर उस स्पाइक प्रोटीन के विरुद्ध एंटीबॉडी बनाते हैं। तब जब वायरस अटैक करता है तब एंटीबॉडी उससे लड़ने में सक्षम होते हैं।
वायरल वेक्टर प्लेटफॉर्म कैसे करता है काम
एक दूसरे सवाल में में कि वैक्सीन बनाने वाला वायरल वेक्टर प्लेटफॉर्म कैसे काम करता है, इस बारे में डॉ धमीजा बताते हैं इसमें नुकसान नहीं पहुंचाने वाले वायरस को लेकर उसके जीनोम में सार्स कोविड-19 वायरस का आरएनए मैसेंजर डाला जाता है। फिर इसी हार्मलेस वायरस को शरीर में इंजेक्ट किया जाता है, जो हमारी कोशिकाओं को स्पाइक प्रोटीन) बनाने को कहता है। फिर इसके विरुद्ध हमारे शरीर में एंटीबॉडी बनने लगते हैं और उस दशा में जब असली कोविड वायरस हमला करने पर भी शरीर को प्रभावित नहीं कर पाता है।

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