अंडे और चिकन को अच्छे से पका कर खाएं, 70 डिग्री तापमान के ऊपर मर जाता बर्ड फ्लू वायरस
पोल्ट्री कौवों, प्रवासी पक्षियों की असमान्य मौतों की घटनाओं के मद्देनजर एवियन इंफ्लुएंजा फैलने की स्थिति को समझने और राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों को इस बीमारी के नियंत्रण व रोकथाम के उपाय सुझाने के लिए राज्यों के साथ बैठक बुलाई गई, जिसके साथ ही इस बीमारी के बारे में मुर्गी पालने वाले किसानों और आम जनता को भ्रांतियों से दूर रखने की कोशिशें भी की जा रही हैं।
2006 से अब तक इंसानों में बर्ड फ्लू का एक भी मामला नहीं हुआ रिपोर्ट
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) पशु विज्ञान के पूर्व उप महानिदेशक डॉ. के एम. एल. पाठक का कहना है हमारे देश में 2006 से बर्ड फ्लू रिपोर्ट होना शुरू हुआ। तब से लेकर अब तक भारत में मनुष्यों में इसके संक्रमण का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। साथ ही अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है कि प्रदूषित पोल्ट्री उत्पादों की खपत के माध्यम से बर्ड फ्लू का वायरस मनुष्यों को संक्रमित कर सकता है।
पोल्ट्री इंडस्ट्री से जुड़े लोग इन बातों का रखें ध्यान
जो लोग पोल्ट्री इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं उन्हें खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए कि जब आप बाड़े में दाना डालने जाते हैं या अंडे इकट्ठा करने जाते हैं तो ग्लव्स और फेस मास्क जरूर पहनें। साथ ही साथ जहां मुर्गियों या पक्षियों का हाउसिंग सिस्टम बनाया गया है वहां पर चूना अवश्य डालें।
70 डिग्री तापमान के ऊपर मर जाता बर्ड फ्लू का वायरस
डॉक्टर के. एम. एल. पाठक अहम जानकारी देते हुए बताते हैं कि बर्ड फ्लू का वायरस 70 डिग्री तापमान के ऊपर मर जाता है। प्रोटीन का सबसे सस्ता और अच्छा साधन चिकन और अंडा है तो इसे खाना बंद न करें और न ही किसी तरह की भ्रांति में आइए। बस आपको सावधानी यह बरतनी होगी कि अंडे और चिकन की प्रोपर कुकिंग होनी चाहिए जिसमें चिकन पूरी तरह से पका हुआ हो। इस बात का विशेष ध्यान रखें की कहीं से भी चिकन कच्चा न रहे। साथ ही कच्चा अंडा नहीं खाएं या आधा कच्चे अंडे का सेवन भी न करें।
पक्षियों के बीच किसी भी असामान्य मृत्यु दर पर रखें नजर
एवियन फ्लू से प्रभावित राज्यों से आग्रह किया गया है कि वे पक्षियों के बीच किसी भी असामान्य मृत्यु दर पर नजर रखें और तुरंत इसकी जानकारी दें ताकी आवश्यक उपाय तेजी से किए जा सकें। इस संबंध में डॉक्टर के. एम. एल. पाठक का कहना है कि यदि संक्रमण हो गया है और मुर्गी मर गई है या पक्षी मर गए हैं तो आपको उसे छूना नहीं है और न ही आपको उसे डिस्पॉज ऑफ करना है। आपको केवल इतना करना होगा कि अपने नजदीकी वेटनरी डॉक्टर क्लिनिक या प्राइवेट अस्पताल या सरकारी अस्पताल या मेडिकल डॉक्टर है या वाइल्ड लाइफ से जुड़े फोरेस्ट डिपार्टमेंट के लोगों को इस संबंध में सूचित करना है।
अफवाहों पर काबू पाने की कोशिशों के साथ पोल्ट्री फार्मों की जैव सुरक्षा को मजबूत बनाना, प्रभावित क्षेत्रों का किटाणुशोधन करना, मृत पक्षियों के शवों का उचित निपटान, संक्रमित पक्षियों से पोल्ट्री और मनुष्य में बीमारी के प्रसार की रोकथाम के लिए सामान्य दिशानिर्देशों के साथ-साथ निगरानी योजनाओं को सघ्न रूप से लागू किया जा रहा है।

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