टीकाकरण के दौरान भी जारी रहेगा वैक्सीन पर शोध

 टीकाकरण के दौरान भी जारी रहेगा वैक्सीन पर शोध : स्वास्थ्य विशेषज्ञ




केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विषय विशेषज्ञ समिति की बैठकों के बाद मैसर्स सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के ‘कोविशील्ड’ और मैसर्स भारत बायोटेक के ‘कोवैक्सिन’ टीके को सीमित आपातकालीन उपयोग की अनुमति दे दी गई है। अभी तक भारत के अलग-अलग हिस्सों में इन टीकों के टीकाकरण प्रक्रिया के तीन सफल मॉक ड्रिल हो चुके हैं। लेकिन फिर भी लोगों के मन में इस प्रक्रिया को लेकर कुछ सवाल थे। इन दुविधाओं को दूर करने के सन्दर्भ में आकाशवाणी के एक रेडियो कार्यक्रम में डॉ एन एन माथुर ने इस टीकाकरण प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें बताईं।

उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि वो यह मान कर चल रहे हैं कि जिस किसी को भी वैक्सीन दी जाएगी, उसमें कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हो जाएंगे। अब कितने प्रतिशत लोगों में होंगे यह शोध का विषय रहेगा। टीकाकरण के दौरान भी अध्ययन जारी रहेगा। अध्ययन में एकत्र किया जाने वाला डाटा पब्लिक डोमेन में भी आएगा और लोगों को बताया जाएगा कि वैक्सीन की एफिकेसी कितनी है।

कोरोना से ठीक हुए लोगों के लिए भी टीकाकरण जरुरी

एक बड़ा सवाल जो लोगों के मन में इस प्रक्रिया को लेकर है वो यह है कि जब देश में स्वस्थ होने वालों की दर 96% हो गई है, तो क्या सभी को टीका लेना जरूरी है? वक्ता से बात करते हुए लेडी होर्डिंग हॉस्पिटल के निदेशक डॉ माथुर ने बताया, “96 प्रतिशत रिकवरी रेट का मतलब, जितने लोगों को यह बीमारी हुई थी, उनमें 96 प्रतिशत लोग ठीक हो गए हैं। उसका मतलब यह नहीं है कि 96 प्रतिशत लोग प्रतिरक्षित हो गए हैं या उनके अंदर एंटीबॉडीज आ गए हैं। इसलिए वैक्सीन सभी के लिए जरूरी है।" उन्होंने यह भी बताया कि पहली डोज के बाद लोगों को उसी टीके की दूसरी डोज के लिए 4 हफ्ते के बाद बुलाया जायेगा।

टीकाकरण के लिए कोविन एप पर करवाना होगा पंजीकरण

वक्ता के पूछने पर डॉ माथुर ने बताया कि जब वैक्सीन आयेगी, तब सभी को कोविन ऐप पर पंजीकरण करवाना होगा। वहीं ऐप के अलावा कैसे पंजीकरण करा सकते हैं, यह भी जिला प्रशासन की ओर से अवगत कराया जाएगा। अगर लोग दी गई तिथि पर नहीं पहुंच पाते हैं, तो उनका नंबर फिर कितने दिन बाद आयेगा, यह सब सरकार बतायेगी।लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जो तारीख दी जाए, उस पर जरूर पहुंचे क्यूंकि सरकार लोगों के लिए बहुत मुश्किल काम कर रही है।

प्रचुर मात्रा में एंटीबॉडीज विकसित करने के लिए दिये जाएंगे दो डोज

अभी तक जितनी भी वैक्सीन तैयार की गई हैं, उनका ट्रायल दो डोज़ के साथ ही किया गया है। तमाम परीक्षणों में यह पता चला है कि वैक्सीन के दो डोज़ के बाद ही अच्छी मात्रा में एंटीबॉडीज विकसित होते हैं। डॉ माथुर ने बातचीत के दौरान बताया कि पहले कितनी मात्रा में एंटीबॉडी थे और वैक्सीन लगाने के बाद कितने हो गए, यह पता करने के लिए हमारे पास वक्त नहीं है। यह एक प्रोटोकॉल है, जिसके आधार पर हर व्यक्ति को दो डोज लगेंगी, पहली साधारण एवं दूसरी बूस्टर।

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