आखिर कैसे पाया जा सकता है 'बर्ड फ्लू' पर काबू, जानें विशेषज्ञों की राय
'बर्ड फ्लू' की दस्तक से बेजुबान परिंदों से लोगों को डर लगने लगा है। ऐसे में पैनिक जैसी स्थिति पैदा हो गई है। क्या इसे लेकर इतना डरने की जरूरत है और क्या इसका समाधान है? साथ ही किस तरह से इससे सतर्कता बरतें और क्या इस पर काबू पाया जा सकता है? इन्हीं सवालों के जवाब दे रहें है विशेषज्ञ। आइए जानते हैं इनके बारे में...
किस तरह से फैलता है 'बर्ड फ्लू' का संक्रमण
देश के कुछ राज्यों से बर्ड फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं। अभी तक मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और केरल समेत देशभर में सात राज्यों में बर्ड फ्लू का प्रभाव देखा जा रहा है। ये एवियन इंफ्लुएंजा वायरस का संक्रमण है जिसे आमतौर पर 'बर्ड फ्लू' के नाम से जाना जाता है। यह मुख्य तौर पर जंगली पक्षियों को होता है। हालांकि उनके अलग-अलग जगहों पर जाने की वजह से ये वायरस शहरी पक्षियों में भी फैल जाता है। बर्ड फ्लू का वायरस पक्षियों के कान, नाक, मुंह के जरिए फैलता है। साथ है उनके मल से भी इसके फैलने का खतरा रहता है।
'बर्ड फ्लू' की समस्या कितनी बड़ी है
आमतौर पर यह वायरस जंगली पक्षियों में पाया जाता है लेकिन जब ये मुर्गी, कबूतर, कौवों या अन्य पक्षियों को संक्रमित करने लगे तो समस्याएं बढ़ने लगती हैं। केरल ने बर्ड फ्लू को आपदा घोषित किया है। बर्ड फ्लू के मामले सामने आने के बाद कई और राज्यों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
इंसानों में बर्ड फ्लू के संक्रमण का अभी तक नहीं मिला कोई केस
भारत में मनुष्यों में अभी तक इसके संक्रमण का पता नहीं चला है। भारत में यह बीमारी मुख्य तौर पर प्रवासी पक्षियों द्वारा फैलती है जो सर्दियों के शुरुआती महीनों में भारत में आते हैं। केंद्र सरकार ने सतर्कता दिखाते हुए राज्यों को नियंत्रण और इसके प्रसार को रोकने के लिए किए जाने वाले उपायों के बारे में सुझाव दिए हैं। दिल्ली में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है ताकि स्थिति पर निगरानी रखी जा सके। बर्ड फ्लू पर नियंत्रण और बचाव के लिए सावधानी और सतर्कता आवश्यक है।
विशेषज्ञों की राय:
एम्स के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के पूर्व एचओडी डॉक्टर जी.सी. खिलनानी बताते हैं "बर्ड फ्लू वाइल्ड बर्ड्स में पाया जाता है और यह ट्रांसमीट होता है। अभी यह भारत में आ गया है। लेकिन इस स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। ये बेसिकली इंफ्लुएंजा वायरस ही होता है। अभी हम कोरोना महामारी के दौर से गुजर ही रहे हैं इसलिए ये बर्ड फ्लू के आ जाने से भी लोगों में पैनिक मल्टीप्लाई हो गया है। इंफ्लुएंजा वायरस तीन तरह के होते हैं। इफंलुएंजा ए, बी एंड सी। इनमें से 'इंफुएंजा ए' ज्यादा बीमारियां फैलाता है।
इंसानों में डायरेक्टली ट्रांसमीट नहीं होता 'बर्ड फ्लू'
डॉक्टर जी.सी. खिलनानी आगे बताते हैं कि बर्ड फ्लू में जो वायरस होता है यह अमूमन इंसानों में डायरेक्टली ट्रांसमीट नहीं होता। लेकिन इनमें कुछ प्रकार ऐसे होते हैं जिनमें एक्सीडेंटली यह वायरस ट्रांसमीट हो सकता है जैसे यदि कोई व्यक्ति पोल्ट्री फार्म आए और बर्ड फ्लू का वायरस उसमें कंस्प्शन हो जाए तो ऐसी स्थिति में यह ट्रांसमीट कर सकता है। लेकिन सामान्य तौर पर ऐसा नहीं होता है।
एहतियात बरतें तो बर्ड फ्लू से किया जा सकता है बचाव
यह एहतियात बरती जाती है कि जो भी पोल्ट्रीज हो जो कि ह्यूमन कंसंप्शन में होती हैं, उसमें यदि पक्षियों की मौत होने लग जाती है तो आवश्यक कदम उठाते हुए उनकी करलिंग की जाती है उसे प्रिवेंट करने के लिए। ये सभी प्रिवेंटिव मेजर्स हैं ताकि इस तरह का इंफ्लुएंजा जंगली बर्ड्स से और माइग्रेटरी बर्ड्स से होते हुए और फिर पोल्ट्री फार्म से होते हुए इंसानों में न आए।
हर साल सर्दियों के दिनों में फैलता है इंफ्लुएंजा
एंटीजेनिक शिफ्ट और एंटीजेनिक ड्रिफ्ट की वजह से आउटब्रेक्स और पेनडेमिक्स हुए हैं और स्पेनिश लोग उसका एक उदाहरण है जिसमें 5200 मिलियन मौतें हुईं थीं। दरअसल, यह एक सिचुएशन है जिसको रोका जा सकता है। वैसे यदि हम इंफ्लुएंजा की बात करें तो यह हर साल सर्दियों के दिनों में फैलता है।
बचाव के लिए सरकार द्वारा उठाए जाते हैं ये कदम
एनिमल हसबेंडरी के कमिश्नर डॉक्टर प्रवीन मलिक बताते हैं 'जिस तरह की स्थिति हमें जनवरी के पहले दिन से समझ आई और जिस तरह से रिपोर्ट होना शुरू हुई है जिनमें सात राज्यों में बर्ड फ्लू से जुड़ी मामले दर्ज हुए जिन्हें बाद में कंफर्म कर दिया गया, इनमें केरल और हरियाणा दो राज्य ऐसे हैं जिनमें डोमेस्टिक बर्ड्स में भी यह बीमारी पाई गई है। बता दें केरल में बत्तखों में और हरियाणा में पोल्ट्री में यह डिजीज पाई गई है। बाकी पांच राज्यों में मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश शामिल है। सिर्फ हिमाचल में एच5एन1 का प्रकोप देखा गया है।
इस स्थिति में मेजर ऑपरेशन होता है कि सर्विलांस करके वायरस को डिटेक्ट करना और उसके तुरंत बाद ऑपरेशन शुरू करना। ताकी आसपास के 1 किलोमीटर के अंदर कोई दूसरी बर्ड्स उससे इंफेक्ट न हो पाए। इंफेक्टेड पक्षियों को कर्ल करके डेस्ट्रॉय करते हैं और फिर उसके बाद सैनिटेशन ऑपरेशन शुरू किए जाते हैं।
केरल ने अपने कलिंग और डिसइंफेक्शन सैनेटाइजेशन के ऑपरेशन पहले से ही पूरे कर लिए हैं। उन्हें पोस्ट ऑपरेटिव सर्विलांस प्लान की गाइडलाइंस इश्यू कर दी हैं। ऐसे में केरल में स्थिति नियंत्रण में हैं। हरियाणा ने भी कलिंग शुरू कर दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि बहुत जल्द वहां पर भी स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी।
वाइल्ड बर्ड्स में कलिंग करके स्थिति को नियंत्रण में कर पाना मुश्किल हो जाता है। फिर यदि ऐसी स्थिति सामने आती है जिसमें जंगली पक्षियों की मौत ज्यादा हो रही हो तो उस एरिया में मरने वाले पक्षियों की रिपोर्टिंग, सर्विलांस और उस एरिया की बायो सिक्यॉरिटी, खासतौर से यदि उस इलाके में कोई पोल्ट्री फार्म है तो उन जगहों पर बायो सिक्यॉरिटी को बढ़ाया जाता है। इसमें कोओर्डिनेशन फोरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ रहता है। ये हमें पक्षियों में होने वाली अनयुजुअल डेथ्स रिपोर्ट करते हैं।

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