भारत की बड़ी उपलब्धि, महामारी से बचने के लिए पूरी डोज जरूरी

कोविड वैक्सीन होगी स्वैच्छिक, महामारी से बचने के लिए पूरी डोज जरूरी



भारत में एक साथ दो वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। डीसीजीआई ने कोवीशील्ड और कोवैक्सिन को अनुमति दे दी है। इस बारे में केंद्र सरकार ने कहा है कि भारत में स्वीकृत कोविड 19 का टीका अन्य देशों में विकसित किये गए किसी भी वैक्सीन के समान असरदार है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड वैक्सीन से संबंधित विभिन्न पहलुओं के बारे में बार-बार पूछे जाने वाले सवालों के जवाब भी दिए हैं।

वैक्सीनेशन के लिए किया गया वर्गीकरण

मंत्रालय ने कहा कि टीके की सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न चरणों में इसके ट्रायल किये गए। प्रारंभिक चरण में उच्चतर जोखिम वाले चुने हुए वरीयता समूहों को टीका प्रदान किया जाएगा। टीका पाने वाले प्रथम वरीयता समूह में स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारी और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता शामिल होंगे। दूसरे समूह में पचास वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति और विभिन्न बीमारियों से पीड़ित पचास वर्ष से कम आयु के व्यक्ति शामिल होंगे।

इस दौरान मंत्रालय ने कहा है कि कोविड का टीका स्वैच्छिक होगा। परन्तु यह सलाह दी गई है कि इस महामारी से रक्षा के लिए लोगों को कोविड19 टीके की पूरी डोज लेनी चाहिए। इससे परिवार के सदस्यों, मित्रों, संबंधियों और साथ काम करने वालों को वायरस के संक्रमण से बचाने में मदद मिलेगी।

भारत के लिए बड़ी उपलब्धि

देश में दो वैक्सीन को हरी झंडी मिलने पर गंगाराम हॉस्पिटल के डॉ. ले.जनरल वेद चतुर्वेदी कहते हैं कि यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। शायद लोगों को यह नहीं मालूम है कि मेडिकल के क्षेत्र में हम बहुत आगे हैं। दुनिया के तमाम देश वैक्सीन पर काम कर रहे हैं, लेकिन हम उन चुनिंदा देशों में से एक हैं जहां वैक्सीन बनकर तैयार हुई है। सभी को मालूम होना चाहिए कि बच्चों को दी जाने वाली वैक्सीन के वृहद स्तर पर विनिर्माण के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। कोविड वैक्सीन बनाने में 5-6 साल लग सकते थे, लेकिन हमने यह दिखा दिया कि हम कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहे हैं।

इमर्जेंसी के लिए प्रयोग होगा कोवैक्सिन

वैक्सीन को मिली मान्यता से पहले उसके क्लीनिकल ट्रायल के सभी परिणाम के बारे में डॉ वेद ने कहा कि जब ऑक्सफ़ोर्ड और फाइज़र की वैक्सीन बनना शुरू हुईं, तब उसी दौरान हमारे देश की भारत बायोटेक ने भी वैक्सीन बनाना शुरू की। अब देखिए लगभग उतने ही समय में स्वदेशी वैक्सीन भी तैयार है। चूंकि समय बहुत कम था, इसलिए तीसरे फेज़ के ट्रायल के कुछ परिणाम अभी आने बाकी हैं। आपको बता दें कि ये वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। फिलहाल जब तक कोवैक्सिन के सारे परिणाम नहीं आ जाते और उसका डॉक्यूमेंटेशन पूरा नहीं हो जाता तब तक उसे इमर्जेंसी के लिए रखा जाएगा।



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